क्यूं नहीं बनती ऐसी दर्दनाक घटनाएं
मीडिया की खबर, क्यूं नहीं होती
इनके लिये न्याय मांगने की अनवरत मुहिम
क्यूं नहीं करते बहस लोग इस बात पर
दब क्यों जाते हैं कमजोरों के
बेबस लाचार मासूम लड़कियों की
पीड़ाओं के क्षीण से स्वर
क्यो़ नहीं उनके लिये कभी बोलते
रोज टीवी की बहसों में गरजते ऐंकर
क्यो़ं नहीं वहां तक पहुंच पाते
वो सारे चैनल जो हर बात पे कहते हैं
कि वो सबसे पहले ,सबसे तेज दिखाते हैं हर खबर
क्यों नहीं खींचती ऐसी घटनाएं ध्यान उनका
जो बनते हैं सच के पुजारी
वो सारे रहनुमा वो सारे रहबर
न्याय उनके लिये मांगने की मुहिम में
लगे रहो योगिता आप अकेले ही
देगें हम सभी साथ तुम्हारा होकर मुखर
(यह रचना समर्पित है योगिता भयाना को जो अकेले ही बलात्कार पीड़ित लड़कियों और महिलाओं को न्याय दिलाने की मुहिम मेंं लगीं हुई हैं।उनके साहस और प्रतिबद्धता को नमन)

