इस शहर के बीचोंबीच एक रास्ता है
जिस रास्ते के मध्य में एक पगडंडी है
इसके दोनों तरफ विपरीत दिशाओं में
लोग आते जाते हैं, क्योंकि मार्ग एकतरफा है
लोग एक मार्ग अपनाने के बाद
सिर्फ़ एक ही दिशा में जा सकते हैं
सिर्फ़ पगडंडी पर चलने वाले
किसी भी दिशा में जा सकते हैं।
मार्ग कोलाहल से भरे हुए हैं
हर तरफ़ गूंज रही हैं आवाज़ें
आवाज़ें ही आवाज़ें
एक आवाज़ को काटती हुई
दूसरी आवाज़ या आवाज़ें
एक आवाज़ को दबाती हुई दूसरी आवाज़
एक आवाज़ को धकियाती हुई दूसरी आवाज़
एक आवाज़ को लतियाती हुई दूसरी आवाज़
एक दूसरे से गुत्थमगुत्था आवाज़ें
एक दूसरे की आवाज़ में
आवाज़ मिलाती आवाज़ें
चीखती हुई नाटकीय आवाज़ें
सबसे तेज होने का दावा करती आवाज़ें
सबसे सच्ची होने का दावा करती आवाज़ें
सबसे अच्छी होने का दावा करती आवाज़ें
आवाज़ों के कोलाहल में दबी हुई
जिनको सुनता नहीं कभी कोई
वो सहमी-सहमी, दबी-दबी आवाज़ें
अपनी आवाज़ को
ऊंचा उठाने की होड़ करती आवाज़ें।
पगडंडी पर चल रहे हैं बहुत से लोग
रोजमर्रा के अपने काम से निकले हुए
वो चल रहें हैं चुपचाप अपना सर झुकाए
निर्विकार भाव से
जैसे उन्होंने ठूंस रखी हो कानों में रुई
या इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कान उनके
इन आवाजों के कि
कोई अंतर नहीं पड़ता उन्हें
उनके लिए ये सामान्य ध्वनियां हैं
अर्थहीन ध्वनियां जिनसे
कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला
उनके जीवन पर
कुछ बदलाव नहीं आने वाला
उनके जीवन में।
इसी पगडंडी पर चलते हुए
मुठ्ठी भर लोग ऐसे हैं जो
इन आवाज़ों में अर्थ ढूंढ़ते हैं
उन्हें समझने का प्रयत्न करते हैं
कर्कश ध्वनियों में निहित सूक्ष्म अर्थ
सुन लेते हैं उनके कान ,
देख लेती है उनकी दृष्टि।
आवाज़ों को नियंत्रित करती हैं
कुछ गिनी-चुनी आवाज़ें
करती हैं उनकी दिशा
और ध्वनि नियंत्रित।
उनको शोर मचाने वाली
दोनों तरफ़ चलने वाली
या पगडंडी पर निर्विकार भाव से
चलने वाली भीड़ से कोई भय नहीं
उनके सामने
या तो नतमस्तक हैं वो आवाज़ें
या उनका अस्तित्व
कोई मायने नहीं रखता।
कभी कभी उन्हें भय होता है तो बस
उन मुठ्ठी भर
पगडंडी पर चलते हुए लोगों से
जो समझते हैं उनकी आवाज़ों में
निहित छुपे मंतव्य
और उनके अघोषित गंतव्य।
उन्हें लगता है कि
कहीं इन लोगों की संख्या न बढ़ जाए
और कहीं वो कर न दें औरों को भी प्रदान
अपनी दृष्टि और अपने कान।