जब जीत- हार के प्रश्न बड़े हों
जब सामने
अस्तित्व के संकट खड़े हों।
तब ध्यान किसे धर्म का
आचरण की गरिमा का
युद्ध के नियमों का
गिरते हुए शवों का
घायलों की चीखों का।
अस्तित्व की रक्षा रह जाता है
मात्र एकमात्र ध्येय
मात्र एकमात्र लक्ष्य
मात्र एकमात्र विकल्प
जय-पराजय
तब विकल्पों में
नहीं होते।