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असहज


जो बैठे शिखरों परउनको असहज कर दें जो,घाटी के सहज सत्य भीउनको कब स्वीकार थे।उनके जुगनुओं में भी थे तेज सूर्य केऔरों के सूर्य भी उनकी दृष्टि मेंमात्र अंधकार थे।

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