तेरे संग वक्त कैसे गुजरता है पता ही नहीं चलता
वो देख ले आफताब ढल गया बातों ही बातों में
वो देख उफक से कैसे झांक रहा है खूबसूरत माहताब
चल गुजार ही लें हम आज की रात बातों ही बातों में
तू कुछ अपने दिल की कहे मैं कुछ अपने दिल की सुनाऊँ
बुन ले हम मिलकर कोई इक साझा ख्वाब बातोंही बातों में
चल कुछ वादे कर लें इक दूजे से चल कुछ कसमें खायें
जाहिर कर दें दिल में छुपे सारे जज्बात बातों ही बातों में
कुछ देर निहारेंगे चांद खामोशी से लेकर हाथों में हाथ
धड़कनों को ही करने देगें सारी बात बातों ही बातों में
तू पसंद नापसंद अपनी बता देना मैं भी तुझको अपने बारे में बतला दूंगा जान ही लेगें एक दूसरे को बातों ही बातों में
गुजरेगी जो ये शब इक नई सहर आयेगी नया पैगाम लिए
कर लेगें आगाज अपने चमकीले दिन का बातों ही बातों में

