कुछ हृदयों को अनजाने दुखाने
का अनकहा अपराधबोध सालता है ,
एकांत के निजी क्षणों मेंं ।
बहुत कुछ बिन कहे
रहा जा सकता था ।
जो कह न सके
कहा जा सकता था।
अपने दुख ,अपनी पीड़ाएं
चुपचाप सहा जा सकता था।


कुछ हृदयों को अनजाने दुखाने
का अनकहा अपराधबोध सालता है ,
एकांत के निजी क्षणों मेंं ।
बहुत कुछ बिन कहे
रहा जा सकता था ।
जो कह न सके
कहा जा सकता था।
अपने दुख ,अपनी पीड़ाएं
चुपचाप सहा जा सकता था।