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अपराधबोध


कुछ हृदयों को अनजाने दुखानेका अनकहा अपराधबोध सालता है ,एकांत के निजी क्षणों मेंं ।बहुत कुछ बिन कहेरहा जा सकता था ।जो कह न सकेकहा जा सकता था।अपने दुख ,अपनी पीड़ाएंचुपचाप सहा जा सकता था।

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