मैंने गीत तेरे लिए न जाने कितने गाये

क्या करुं यदि वो तेरे कानों तक पहुंच न पाये

क्या करुं अगर मिटे न तेरे मन के अंधेरे

दीप थे मैंने पथ पर तेरे कितने जलायें


उस पथ भी मैं फिरा जिस पथ पर

तेरे पग कभी थे डगमगाए

दुख जिये मैंने तेरे जो थे तूने कभी पाए

वो जो सहेजकर रखे तूने हृदय से लगाए


आवाजें मैंने तुझे कितनी लगायीं

तुझे थामने को थे मैंने हाथ भी बढ़ाएं

तुझे बदलना है स्वयं ही अपना जीवन

अपार जीवन मेंं हैं छुपी अनगिनत अनंत संभावनाएंं


पथ तुझे चुनने हैं स्वयं ही अपने

हैं राह में तेरी कितनी ही अड़चनें

उलझा हुआ है कितना वर्तमान

हैं भविष्य की कितनी ही आशंकाएं


चल उस चुने हुये पथ पर

जो होंं तेरे लिए श्रेयस्कर

तुझे अब कोई क्या बताए

तुझे कोई क्या सिखाए