जीवन में हम :

क्या एक ही पुष्प के सौंदर्य की प्रशंसा करते हैं

क्या एक ही तितली हमें सुंदर लगती है

क्या एक ही पर्वतीय स्थल हमें आकर्षित करता है

क्या बस एक ही नदी का बहाव हमारा मन मोहता है

क्या एक सूर्योदय देखकर हमारा मन भर जाता है

क्या एक सूर्यास्त का सौंदर्य देखने के उपरांत

हमें सूर्यास्त सौंदर्यहीन लगने लगता है

क्या नील नभ में उड़ते हुए श्वेत मेघों का सौंदर्य

एक बार के बाद हमें पुनः आकर्षित नहीं करता


क्या एक स्वप्न पूरा होने के पश्चात

हम नवल स्वप्न देखना छोड़ देते हैं


क्या मात्र एक स्थान की यात्रा के पश्चात

हम यात्राएं करना छोड़ देते हैं


क्या एक ही महासागर का असीम विस्तार देखकर

हमारी अन्य सागरों और महासागरों को

देखने की इच्छा समाप्त हो जाती है

क्या एक मंदिर घूम कर

हमारी और मंदिरों के देखने की चाह नहीं होती

क्या एक महल और एक किला देखने से

हमारी और महलों और दुर्गों को

देखने की चाह मिट जाती है


क्या एक जंगल देखने से

हमारा मन भर जाता है

क्या एक म्यूजियम कर देता है

हमारी सारी जिज्ञासाएं शांत


क्या एक अच्छी पुस्तक पढ़ने के उपरांत

हम नहीं चाहते हैं और पुस्तकें पढ़ना


क्या आपने प्रिय संगीतकार का एक राग,

गीतकार का एक गीत,

गायक का एक गीत सुनने के उपरांत

हम उनके और राग और गीत नहीं सुनना चाहते


हम एक नहीं अनेक पुष्पों का सौंदर्य देखना चाहते हैं

अनेक नदियों,सागरों, स्थानों

पर्वत शिखरों को देखना चाहते हैं

अनेक जंगलों ,अनेक म्यूजियमों को देखना चाहते हैं

अनेक पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं

अनेक गीत सुनना चाहते हैं

यह सहज मानवीय गुण है

इसकी सौंदर्य क्षुधा कभी कम नहीं होती

जिसकी तृष्णा कभी मिटती ही नहीं


ऐसे ही जीवन में

हम मात्र एक नहीं

करना चाहते हैं अनेक प्रेम