आज निशा क्या नयनों में मिलन के स्वप्न आयेंगे

 या गीत फिर विरह के यामिनी गुनगुनायेगी।


दिवस आज सबसे लम्बा था पर रीता -रीता बीत गया, 

रात सबसे छोटी है क्या वो भी एकाकी बीत जायेगी।


क्या आज रात बरसायेंगे मेघ प्यासी धरा पर नेह गगन से,

या अधूरी तृप्ति की चाह,अनबुझी प्यास रह जायेगी।