पिताओं

अगर तुम्हें कभी स्वयं को         

स्वयं की स्त्रियों के प्रति सोच को 

सही सही हो आंकना 

तो अपनी युवा बेटियों से 

थोड़ी सी बहस कर लेना।   

उनकी आंखों में आंखें डालकर झांकना

उनके कहे को ध्यान से सुन लेना

 और फिर सोचना       

कुछ कह भर देने से

लिख भर देने से

और वही जीवन में जी लेने में 

कितना अंतर होता है

 घड़ी दो घड़ी में

तुम्हें दिख जायेगा आईना।