
झूठ और फरेब से रहता हूं जरा दूर
सीधी सीधी सच्ची बात कहने में रखता हूँ मैं यकीन
लोग मानते हैं इस बात का भी बुरा
तो इसमें मेरा क्या कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
उम्मीद करते हैं लोग मुझसे मैं मिलाऊगा उनकी हां मे हां
पर मेरे इनकार से उनको लग जाता है बुरा
उनके गुरुर को लग जाती है ठेस
तो इसमें मेरा क्या कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
कई बार मैं कुछ तनहा और खामोश सा हो जाता हूं
अब इस बात से लोग समझें मुझे मगरुर
तो ये उनकी है परेशानी
और उनका है सरासर कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
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