झूठ और फरेब से रहता हूं जरा दूर
सीधी सीधी सच्ची बात कहने में रखता हूँ मैं यकीन
लोग मानते हैं इस बात का भी बुरा
तो इसमें मेरा क्या कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
उम्मीद करते हैं लोग मुझसे मैं मिलाऊगा उनकी हां मे हां
पर मेरे इनकार से उनको लग जाता है बुरा
उनके गुरुर को लग जाती है ठेस
तो इसमें मेरा क्या कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
कई बार मैं कुछ तनहा और खामोश सा हो जाता हूं
अब इस बात से लोग समझें मुझे मगरुर
तो ये उनकी है परेशानी
और उनका है सरासर कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
दोस्तों को हमेशा बसाकर रखता हूँ मैं अपने दिल मेंं
ये अलग. बात है कई बार मैं उनसे कर नहीं पाता बातें
इस बात से गर हो उनको नाराजगी और तोड़ दें रिश्ते
तो इसमें मेरा क्या कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
कई बार लोग जो सुनना चाहते हैं मैं कहता नहीं
जो चाहते हैं मैं करुं वो मैं करता नहीं
इससे भी हो जाती है लोगों को परेशानी
तो इसमें मेरा क्या कुसूर
आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं
मुझे नहीं है बड़ी समझ दुनियादारी की और रिश्ते निभाने की
कई बार मुझसे हो जाती हैं बातें ऐसी जिससे हो जाता है मुझसे गैरों को गिला और अपनों को शिकायत
मेरा होता है इसमें सरासर कुसूर
पर आदमी मैं दिल का बुरा नहीं हूं

