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पुकार


जलती रही झुगू झुग्गियाँ और बँटती रही रेवड़ियाँ, झोंपड़ियों के इन ठेकेदेरों को हर बार चुना था सहमी रही दीवारें और चीखती रही दीवेरे मीनारें, लाल किले ने इन बाउँटनहारों को हर बार सुने था.

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