एक पल , हाँ एक पल
सबका बीता होगा कोई ऐसा कल
बीता होगा ऐसा पल
जो चाहता होगा हो जाए ऐसा
हर दिन हर क्षण हर हर पल
हाँ बीता था मेरा भी वो क्षण
बीता था वो दिन वो कल
थी सुबह दिन होली का
खेल रहे सब रंग मल- मल
पर मैं तो था यूँ अभागा
इम्तिहान भी जरा पास थे
बंद थी कुन्दी लगा मैं पढ़ने
ना होली , ना ही कोई रंगमहल
लगा था पढ़ने बस पढ़ने
सहसा यूँ ही एक काॅल आया
काॅल था जिसका सुनके वाणी
खिल उठा मेरा मन औ दिल
बन्द किताबें पैर भागे
छत चढ़ के राह ताके
आ गया था मीत मेरा
हुआ आलिंगन फिर रंग मिलन
याद आती हैं वो घड़ियाँ
याद आते हैं वो पल
चक्र रुक जाए वक्त थम जाए
आ जाएँ फिर से वो ही पल
