कविताओं में वो सदियाँ घूमा लाता,
चंद लफ्ज़ों में कहानियाँ बतलाता,
कहकशाँ से वो सितारें तोड़ लाता,
फ़लक से जमीं को आफ़ाक़ पे मिलाता...
कहने वो दिल की बात हमसे कतराता,
लफ़्ज़ों का वो यार वक़्त पे यूँ गैर हो जाता...
~ फ़र्ज़ी ग़ालिब
कहकशाँ = आकाशगंगा/galaxy
आफ़ाक़ = क्षितिज/horizon


