करीब है फिर भी इस पल तू जुदा-२ सा क्यों है, तेरी इस बेरुखी के बाद भी तू मेरे लिए उस खुदा सा क्यों है।
कुछ ख़्वाब है देखे तेरे तेरे बिना गुजारी रातों में, मुकम्मल करने उन्हें ये दिल लुटा लुटा सा क्यों है|


करीब है फिर भी इस पल तू जुदा-२ सा क्यों है, तेरी इस बेरुखी के बाद भी तू मेरे लिए उस खुदा सा क्यों है।
कुछ ख़्वाब है देखे तेरे तेरे बिना गुजारी रातों में, मुकम्मल करने उन्हें ये दिल लुटा लुटा सा क्यों है|