उस परिवार के दर्द को समझकर देखो,
परखकर देखो, अपनेआप को वहां रख कर देखो
ये सिस्टम ये नेता अभिनेता बने बैठे हैं,
संगीन अपराधी है, फिर भी हैवानियत छुपाये बैठे है
गरीब की बिटिया को बेचने पे उतारू है,
इज़्ज़त लूटने के बादखुद की इज्जत को छुपाने पे उतारू है,
रात को अग्नि में शरीर जला दिया, कलयुग का दौर है "मित्रों"
सिर्फ इंसान नही, यहां इंसानियत को जला दिया
"हिन्दू धर्म, रीती रिवाज, बदलता हुआ ये समाज,
आज एक निर्भया जली, कल दूसरी जलेगी
हवस के सबूत मिटाने के लिए,
इन दरिंदो के सामने किसी की ना चलेगी"
आप जिन्दा है, जिन्दा रहे, जिन्दा रहते आप मर चुके हो
इंसानियत बची है अगर, क्या हिन्दू धर्म समझते हो ?
जलती हुई लाश में आपके परिवार की भी लाश होगी,
बहन होगी, बेटी होगी, वो भी कोई रात होगी,
डरिये अपनेआप से किस समाज में जी रहे है आप
मौत तक प्रशासन साथ ना दे, मौत के बाद आग ना दे
उस निर्भया की आवाज़ सुनकर सहम उठता है मनऐसी अनेक निर्भया होंगी, जिससे डरता है मन
आनेवाले समाज और विचारों को अपनाने वालो,
डरो अपनेआप से, समाज से, विश्वास से
मिलाओ अपनी आवाज़, निर्भया की आवाज़ से ।।
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