आपकी याद और आसमां में चाँद

पता नहीं दोनों साथ क्यूँ आते  हैं


जब आते हैं दूर  क्षितिज के ऊपर

क्या कहूँ  बहुत बेचैन कर जाते हैं


मन में छिपते,कभी वो घन में छिपते हैं

दिल की धड़कन को झकझोर जाते हैं


यादों में खो जाना औऱ चाँद को तकना

हृदय विह्वलता कुछ कम कर जाते हैं


ये चाँद और आपकी याद रोज आती है

हम भी अब  रोज इनमें डूब जाते हैं