विपत्ति और अतृप्ति से भरा नीरस जीवन यह बताता है कि अन्तःकरण की गरिमा सूखने और झुलसने लगी है. जड़ें मजबूत और गहरी हों तो जमीन में से पेड़ के लिए पर्याप्त जीवन-रस प्राप्त होकर वह हरा-भरा बना रहता है. आंतरिक श्रद्धा यदि मर न गई हो तो अभावग्रस्त परिस्थितियों में भी सरसता और प्रफुल्लता खोजी जा सकती है .उल्लास सुख-साधनों पर नहीं, उत्कृष्ट दृष्टिकोण पर निर्भर है