||...फिर उठ चलते हैं ||


मेरे शब्द भी बिल्कुल मेरी तरह हैं,,

गिरते हैं,सम्भलते हैं,फिर उठ चलते हैं.


उम्मीदें,आशाएं,निपट निराशा में भी,,

इनसे मिलते हैं हौसले,फिर उठ चलते हैं.


चलते हैं की,चलने की जिद है बाकी,,

राह में विघ्न कैसा, फिर उठ चलते हैं.