सभी लिखते हैं, मैंने भी

#पहली_कविता

आँसुओं से

लिखा था, न कोई लय

न अलंकार, न मिसरे


बस केवल बिंब, एहसास

औ भावों की रसधारा अविरल

अब न कोई प्रमाण इसका

न शेष - अवशेष हीं

बस यादें हैं


जिन्हें हम अक्सर

दुहराते हैं मन में अव्यक्त

शब्दों से परे, पर

सच्ची औ निश्छल सी