क्या तुम्हें पता है

जब ये जहां न होगा तो

हम कहाँ मिलेंगे ?


सितारों के जहां में मिलेंगे

सिर्फ किरणें होंगी चारों ओर

दूर तलक अंधेरा भी होगा

सिर्फ ख्वाब होंगे मेरे-तेरे

क्या तुम्हें पता है...??


सिर्फ इशारों में बातें होंगीं

अहसासों के पुल बांधेंगे

हमारी आंखें बस वही देखेंगे

जो देखना चाहेंगे हम दोनों

क्या तुम्हें पता है...??


ख्वाबों को दुहरायेंगे मिलकर

कुछ नए ख्वाब बुनेंगे मिलकर

न कोई रूठने की बातें होंगी

बस महसूस करेंगे इक-दूजे को

क्या तुम्हें पता है...??


तुम भी चाँद को तकना

हम भी देखेंगे उसपर काले धब्बों को

परियों की भाँति तुम भी आना

हम भी आएंगे चाँद सतह पर

क्या तुम्हें पता है...??


चाँद पर घूमेंगे हम दोनों

जी भर के बातें करेंगे दिल की

जब दोनों का मन भर जाएगा

फिर लौट आएंगे अपने छत पर

क्या तुम्हें पता है...??


ये दुनियाँ इंसानों से भरी पड़ी है

गमों के साये में जीते हैं इंसां हीं

तुम हमको, या हम तुमको क्या बतलायें

अपने गम, अपने किस्से हैं हमदोनों के

क्या तुम्हें पता है...??