सूखे पत्ते सी

हो गई है जिंदगी मेरी

हवा जिधर का रुख करती है

उसी ओर चल पड़ता हूँ

बस चलता रहता हूँ



न हसो हसने वालों

कभी हम भी शाखों की

शोभा बढ़ाते थे

हरे थे, भरे थे, मुस्कुराते थे

तोते मैना के कलवर थे


एक दिन जोर का 

तूफान आया वादियों में

टूट गए टहनी औ 

बिखर गए घोंसले

और कुछ सपने भी


कल का पता नहीं

न हँसो किसी के हश्र पर

ये समय है हिसाब रखती है

हसने और रोने वालों के

जरा संभल के साथी