अजनबी जो बन गया तू मेरा,
पहले था तुझसे नाता मेरा,
जग हो गया सूना तुझ बिन,
थाम ले फिर से दामन मेरा,
चलेगी फिर से पुरवाई वही,
सूख गया है आँगन मेरा,
पतझड़ के तू मौसम लेजा,
सावन बन के वापस आजा,
रूठा रहेगा कबतक तू मुझसे,
कितना जियूँगा तेरा बिना,
हो सके तो बैर मिटा जा,
फिर से वापस जल्दी आजा।
-अवनीश मीरा सोनकर


