मैं कुछ कहना चाहती हूँ 

कई दिनों की कश्मकश के बाद , 

कई मन मसोसने वाली रातों के बाद, 

एक नया नया सा एहसास हुआ है 

कि मैं सच में...तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।

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लोग बदलते हैं, केवल सुना था, आज देखा है मैंने।

ये एहसास बहुत अलग है, 

ये बदलाव बहुत अलग है़,

ये इंसान बहुत अलग है।

जो कल था, वो मर चुका है

मेरे लिए, तुम्हारी फ़िक्र

तुम्हारा दुलार 

तुम्हारा इज़हार 

जो आज भी होता है, पर सच जैसा क्यूँ नहीं लगता है ?

हाँ, कुछ है तुममें , जो बदल चुका है।

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बनारस में सुकून मिलने के लिए

मेरी ज़रूरत थी तुम्हें,

जिस आवाज़ ने दिल में घर किया था,

उसे गूंजने से पहले, मेरी ज़रूरत थी उसे। 

आज इतनी आत्मनिर्भर हो चुकी है 

आज बुरा मानना भूल चुकी है 

इंतज़ार में तड़पना भूल चुकी है 

अकेले रहना सीख चुकी है 

हाँ , मेरे लिए ये आवाज़ भी बदल चुकी है।

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मैं भी बदलना चाहती हूँ 

मैं तुमसे, अपने आप को अलग करना चाहती हूँ 

तम्हें खुश रखने के बहाने सोचना रोकना चाहती हूँ 

तुमसे प्यार किया था, भूलना चाहती हूँ

मैं दिल से, तुमसे अलग होना चाहती हूँ।

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कैसे कर लेते हैं ये आप 

कैसे प्यार में पागल होकर 

सम्भल लेते हैं आप 

कैसे इतनी बेफिक्री लाते हैं आप 

जाने से पहले...इतना सिखाके जाइए

लोगों को भूलते कैसे हैं आप?

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रिश्ते को कभी नाम नहीं दिया

जिसे हमने शरारत समझा वो चालाकी थी आपकी 

जिसका नाम ही नहीं,वो रिश्ता ही नहीं 

जो कहा था,वो सही था...मासूम मैं ही थी, मासूम नहीं थे तुम 

मेरे खयालों ने मेरे साथ धोखा किया, 

जिसने कभी मेरा ख्याल किया ही नहीं... उसीकी 'बेखयाली' के गाने सुनाता रहा 

पागल कर दिया मुझे, इस्से पहले मेरे दिल और दिमाग दोस्त हुआ करते थे। 

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जाने से पहले, मुझे मेरी पहचान लौटाके जाओ 

खुदपर जो विश्वास था, उसे जगाके जाओ

कुछ तोड़ा है, उसे जोड़ तो नहीं सकते... कमसे कम समेटकर हाथों में थमाके जाओ।

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क्या चाहती हैं आप ... कई बार पूछा आपने पर सवाल का जवाब कभी मांगा ही नहीं आपने 

क्या वो प्यार था,या नशे में जो होता है... बहकना था वो? 

बस बहक गए ख्यालों ​​में, 

एहसासों में,

तुम्हारी बातों में।

एहसास तो बदलते हैं, 

आज हैं ... कल नहीं।

क्यों इतना सोचती हो...चिल मारो,एंजौय करो 

अय्याश नहीं हूँ मैं 

एक बार जुड़ जाती हूँ ... तो अपना एक हिस्सा दे जाती हूँ 

तुमसे हर बार हारकर, खुदको जिताती हूँ समझने की कोशिश करती हूँ 

तुम्हारी वक़्त की पाबन्दी को, 

सेहत को, 

झूठी दलीलों को

कठघरे में दोनों तरफ़ मैं ही रहती हूँ, तुम्हें तो पहले ही निर्दोष साबित किया हुआ है।

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बस एक बार सच कह दो 

मैं ​​तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं, एक दोस्त हूँ कम से कम दोस्त हूँ, यही कह दो 

जब अपने सपनों को पूरा होते हुए देखो, एक ख्याल ... गलती से ही सही, अपने मन में ले आना 

कोई हो ना हो .. वो मेरा ख़्याल ज़रूर कर रही होगी 

जो भगवान को नहीं मानती, पर दुआओं को मानती है 

कई परेशानियों के बावजूद 

मेरे चेहरे पर मुस्कान चाहती है

बस इतना ही चाहा है, मैं हँसाऊँ, तुम हँस दो मैं सर पर हाथ फेरुं, तुम सो जाओ

मैं खामोश रहूँ, और तुम कहते जाओ

मुश्किल है, आपसे ना हो पाएगा 

बहुत काम है हमारे पास

कुछ लोग हैं, जिन्होंने मुझसे बेइंतहां प्यार किया था 

उन्हें किस कोने में छोड़ा है ... ढूंढना है

जिन्होंने मेरी हर बद्तमीज़ी का जवाब 

सेवा से दिया है

उनके पैरों में गिरना है 

उनकी ख़ुशी के लिए, ख़ुदको ख़ुश करना है जिस शरीर ने मेरा साथ दिया ..उसे सवांरना है 

जिस चेहरे को दोष दिया, उसी ने सबका पर्दाफ़ाश किया 

आज उसे छूकर सहलाना है 

कुछ वादे किए थे,उन्हें पूरा करना है 

पर एक बात याद रखना

दरवाज़ा धीरे से टिकाया है 

इंतजार रहेगा आपका

पर इतना याद रखिएगा जनाब, मैं नहीं बुलाऊंगी 

अगर वापस आओगे, तो गले तुम्हें लगाना पड़ेगा 

ना कोई रोएगा, ना सहेगा,

मैं मैं नहीं रहूँगी, बदल जाऊंगी 

प्यार फिर से होगा, नयापन होगा उसमें 

अब और नहीं कहूंगी, बहुत कुछ कह दिया मैंने 

कहीं फिर ना बदल जाऊँ मैं।।