मैं कैसे केहदू के

करता नहीं हूं इंतज़ार तेरा,


क्या इतना कमज़ोर था

प्यार मेरा?


तू आके देख एक बार 

मकान में मेरे


कोई आता नहीं अब

पूछने यहां हाल मेरा,


तुझे गुमान हैं 

उस ख़ूबसूरती पर


सच बताना क्या 

मेरी नज़रों से देखता हैं

तुझे यार तेरा?


ज़रा देख एक बार

मैं अकेला खड़ा हूं

तू भीड़ में खो गया हैं,


क्या इस भीड़ में

मिल पाया तुझे 

अभी तक प्यार तेरा?


क्यों देख रही हैं 

मुझे इतने आश्चर्य से आज?


क्या इतना परेशान 

करता है तुझे सवाल मेरा,


मैं शराबी बन गया 

तेरी यादों में,


बन जाता मैं भी

कोई बड़ा आदमी

अगर तेरे अलावा

कहीं होता ध्यान मेरा,


ये कैसा वीराना 

मेरे जीवन में आ गया हैं,


ये जीवन भी नहीं

देता अब साथ मेरा,


उस शहर से निकलो

तो ज़रा रुक जाना,


उस शहर में रहता

हैं प्यार मेरा,


तू याद आता हैं

तो नींद भी खूबसूरत हाेजाती हैं,


तू साथ होती तो

कैसा होता ये

संसार मेरा।


~Akrit


*Visit My Blogs*

akritwrites.blogspot.com

akritwrites.medium.com