कविता


तुम. . . . . . . . . . .


हर मुश्किल का, हल हो तुम

मिले आज ,पर कल हो तुम


तेरे बिन, कमज़ोर हूँ बेहद

भीतर वाला, बल हो तुम


अंतर्मन में, आग लगी है

ठंडा शीतल, जल हो तुम


ऐसा हो कुछ, संग रहे हम

टिक टिक करता, पल हो तुम


मंदिर मस्जिद, माथे टेके

'जतन' उन्ही का, फल हो तुम


कवि

अश्वनी कुमार "जतन"

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश