
कविता
प्यार की खातिर !
प्यार बढ़ाने की खातिर,
हम आओ कुछ तकरार करें,
प्यार का खंज़र हाँथ में ले कर,
इस नफरत पर वार करें,
हाँथ पे हाँथ धरे रहने से,
बात ना बनने वाली है,
बहुत पुराना मर्ज़ है नफरत,
इसका हम उपचार करें,
जहां तलक भी नज़र जा रही,
वैर दिलों पर हावी है,
आपस में हो प्यार सलामत,
वैर को हम लाचार करें,
ऊंच नीच ना पनपे दिल में,
जात-पात ना आड़े हो,
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