नज़्म

कच्ची मोहब्बत 



रो कर हुआ ये हाल, गला भर सा गया है

है हाल यूँ बेहाल, गला भर सा गया है  


भीतर मेरे ज़हन से, कोई चीख रहा है,

लगता है जो था ख़ास, वही मर सा गया है 


दिल में मेरे आवाज़, फकत धड़कनो की है

धोखा, ज़फ़ा, उदासियों से, तर सा गया है 


हम भी शुरू-शुरू में थे, बेहद हरे भरे

दिल गरज़ की आँधियों में, झड़ सा गया है


अपना कोई कहता है तो, करता हूँ शक ज़रा

सुन कर के ऐसी बात 'जतन' डर सा गया है



शायर :-  

अश्वनी कुमार 'जतन' 

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 

(भारत)