बेजिझक,बेफिक्र, बेकौफ से थे, निःछल,निडर, निर्भीक से थे, तन्हाइयो से जूझ रहे थे, फिर भी कुछ ना बोल रहे थे! समाया था डर कँही खो ना दे अपनों को! बात करने के लिये, किसी से समय कँहा मिलता था! फिर भी याद आते थे सब वो अपने हमेशा, मिलने के लिये दिल फ़रियाद करता था!! ~आकिब जावेद