
वो ग़मो को यूं हवा देते हैं।।
हम ख़ुशी को ही भुला देते हैं।।
मेरे वो राज़ से भी है वाकिफ़।।
लोग मिलके ही दग़ा देते हैं।।
आरज़ू है दिलों को जोड़ने की।।
हम ग़मो को ही भुला देते हैं।।
मुख़्तसर सी है ये ख्वाईश मेरी।।
हम भी बिछड़ो को मिला देते हैं।।
ज़ात धर्मो की सियासत में ही।।
वो हमें खूब
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