बूँद हाँ,एक बूँद बारिश की पड़ती है तेरे तन बदन में पिघल उठता है मेरा मन हाँ, वही बूँद बारिश की जिसमे मिला था दो मन समा गई थी जिसमे साँसे नही रहा था होश कुछ भी मन मष्तिष्क में सिर्फ तुम थी और थी वो बूँदे, हाँ, वही बूँदे बारिश की जो आज भी कायम है हाँ,मेरे आँखों में अश्रु बन कर।। तेरी याद बन कर,बारिश की बूँद बनकर।।