राब्ता ना सही सिपेसालर के साथ हमको तो साथ चाहिए अपने यार के साथ होगी कूछ मजबूरियां शायद उनकी तभी तो मुश्किल हैं सुबह उनके दीदार के साथ पर्दा गर हटा ले तो हो जाये दीदार अब ना मुश्किल हो मेरी मौत इस हाल के साथ याद हैं कि उनकी अव जाती ही नही कैसे सफर कटे अब इस इंतज़ार के साथ जिंदगी में एक ये भी सवाल था हो जैसा भी वो उम्र ना कटे तेरे इंतज़ार के साथ मेरी किस्मत में नही कोई शायद,फिर भी जैसा भी सफर हो गुज़रे साथ साथ।। -आकिब जावेद