
छलकता जा रहा हैं वो जाम अब
खुशियां मयखाने में मिला करते हैं
उम्र की झुर्रियां चहरे पे झलक जाती हैं
लोग फिर भी यहाँ जवान हुआ करते हैं
दिन में जो ना कभी इक बार दिखा करते हैं
वो हमें ख्वाब में हर रोज़ मिला करते हैं
देख कर अपने ही हाल पर खुद रोना आया
देखते ही तुम्हे सारे गम भुला दिया करते हैं
तेरा मिलना और यूँ मिल कर बिछड़ जाना
इन अ
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