देश में बढ़ती जनसंख्या
ऊपर से जगह की समस्या
संख्या बढ़ती जायेगी
लोग खाना कहाँ से खायेंगे
ना बची गर जमीन
किसान फसल कहाँ उगाएंगे।।
वक्त के ढेर में मिट गया वजूद
मुट्ठी में बंद होकर रह गया वजूद
पेड़ के डाल से टूट कर,
जैसे पत्ते का मिट गया वजूद
परिवार से अलग होकर,
इंसान का ना रहा कोई वजूद
आसमाँ में खूब उड़े इंसा
मगर मिट्टी से अलग होकर
इंसा का मिट गया वजूद।।
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