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राष्ट्र का है भाग्य तू

भूल को भूल से भूलने को भूले।। कटु जो शब्द है याद जो आते नही।। सत्य को सत्य से सत्यता को  जीते।। कर्तव्य बोध जो हुआ अहंकार को ताड़ने अपने मन के राम को निकाल अब तू सामने।। विद्वान जो तू  हुआ रावण दिखा तू भेष में छल कपट प्रपंच सब अब त
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