फूलो की खुश्बू महकायेगी बयार को
प्यार की चहक चाहकाएंगी दयार को।
एक इश्क की लौ लगा लो तुम जरा
प्यार से गले लगा लो तुम प्यार को।
होती हो बदगुमानी गर तुमको अब भला
थोड़ा सा तुम झुक कर मना लो प्यार को।
रुसवा,जग हंसाई इसमें सब सहना पड़े
थोड़ा सा ये भी सिखा दो गुलशने बहार को।
बाते बनाना जानती हैं,तमाम ये दरों दिवार
थोड़ा सा छुप छुप के मिला कीजिये प्यार को।
वो ना दाँ हैं, जो नफरत कर रहे
इस जहर से बचाया करो,दयार को
मिलता नही हैं कुछ भी,सब खाक हो जाये
खाक होने से बचाओ अपनी दुनिया बहार को।
फिर भी यही कहेंगे चलो इश्क करे
प्यार से रहना सिखाये अपने दयार को।।
-आकिब जावेद