दिल जब देख कर हंस पड़ा हैं
समझो मोहब्बत पास खड़ा हैं
सोच कंही जब आन पड़ी हैं
समझो नफरत जान पड़ी हैं
खुले दरवाजे जब बंद हो जाये
समझो नजदीकियों में विघ्न पड़ी हैं
रोता चेहरा जब हँसता दिख जाये
लगता परेशानियां उसपे टूट पड़ी हैं
रास्ते जब दोहरे मिल जाये
मंजिल से समझो भटक पड़े हैं
सोहबत किसी की मजबूर कर जाये
नज़रो से समझो कोई गिर पड़ा हैं
उम्मीदों पे जो खरा ना उतरे
हमेशा लोग उससे दूर खड़े है!!
-आकिब जावेद