
सोच में तुमको ही सोचूँ,सोच ये होनी चाहिये
मुहब्बत के फ़लसफा में ये कहानी होनी चाहिये
तेरे मेरे इश्क की,कोई पुरानी निशानी चाहिये
चाँद तारो के जैसे,कोई गवाही होनी चाहिये
फूलो के बागों में कोई ख़ुशबू सुहानी चाहिये
उनकी अदाओं से दुनिया दिवानी होनी चाहिये
संगमरमर सा तराशा एक दिल ज़ुबानी चाहिये
कोई मुमताज़ भी दिल में घर होनी चाहिये
सदा देता हैं दिल,शहर में कोई दीवानी चाहिये
इश्क की
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