मेरे मौला मेरे मौला ये पुकारता हूँ मैं दे दे अपनी तू सदा अब ये कहता हूँ मैं गर मुझको मयस्सर नही धागा मोती यूँ अश्को का ही एक मोती मांगता हूँ मैं मेरे मौला मेरे मौला अर्ज़ी ना टाली जाए मेरे मौला तेरे दर का ही एक मँगता हूँ मैं मेरे मौला दो चादरे ही काफी है मेरे लिए ज़िन्दगी में एक ओढ़ लूँ, एक बिछाता हूँ मैं मेरे मौला ने मेरी कस्ती जब भँवरों में फंसा देखा देख तेरी दी हुई दुआओं से अब सिफ़ा हूँ मैं