
लफ़्ज़ों को अपने धार दे,चरित्र को निखार दे
सादगी में जिंदगी गुजार दे, खुशनुमा दयार दे
वो कली कली महक उठे,गली गली चहक उठे
वो मुल्क में भी अपने चमनो अमन दयार दे
हर्फ़ हर्फ़ कुछ कह रहा, अपने कुछ विचार दे
गमगीन ज़िन्
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लफ़्ज़ों को अपने धार दे,चरित्र को निखार दे
सादगी में जिंदगी गुजार दे, खुशनुमा दयार दे
वो कली कली महक उठे,गली गली चहक उठे
वो मुल्क में भी अपने चमनो अमन दयार दे
हर्फ़ हर्फ़ कुछ कह रहा, अपने कुछ विचार दे
गमगीन ज़िन्