हालात को अपने गुजारे चला चल नाख़ुदा को अपने पुकारे चला चल राब्ता भी रख तू अपनो के दरमियाँ सुकूँ भी दिलो के उभारे चला चल ज़ुस्तुज़ु ज़िन्दगी में मिलने की रख अपनी किस्मत को सँवारे चला चल ख्वाइशें भी तमाम रख ज़िन्दगी में गलतियों को अपने सुधारे चला चल नूर तर नूर हो गया नज़रो से दूर ख़ुदा के नूर से उभारे चला चल आहिस्ता आहिस्ता यूँ चलना रहो में ज़िन्दगी को अपने पुकारे चला चल ठोकरे देती है तकलीफ ज़िन्दगी में किसी नाखुदा के सहारे चला चल