कोई उम्मीद तेरे दिल में दबी हो जैसे
ख्वाबो में इश्क की लौ जली हो जैसे
गुंचे गुंचे खिले फूलो को यूँ देखा हमने
कँही प्यार की बयार अब चली हो जैसे
वो तेरी ज़ुल्फों में खो गया कोई जैसे
एक मेरी उम्र इसमें यहाँ कटी हो जैसे
ख़ामोश लम्हे चुरा लू तुझसे ही मैं
कोई चाहत दिल में छुपी हो जैसे
एक झोख़ा हवा का यूँ आया हो ऐसे
मिलने की तड़प दिल में अब उठी जैसे
मौसम का असर हो,कोई सुहाना सफऱ हो
मौसम मौसम डाली में कली खिली हो जैसे
उन्हें सलीका ही ना आया मिलने का कभी
कोई कहानी जिंदगी ने भी लिखी हो जैसे
ना उम्मीदी का दिया दिल में जलाया उसने
तेरे मिलने से दिल में उम्मीद जगी हो जैसे
बंद आँखे करने पे भी जो आता हो नज़र ऐसे
क़िस्मत में किसी का साथ अब लिखी हो जैसे