मुक़द्दर मेरा मुझसे ही अब मिलता जा रहा है मेरा दुश्मन ही अब मेरा दोस्त बना जा रहा है।। वो अंजान रास्तो पे हमेशा ऐसे ही चला है मुश्किल हालातो पे हमेशा ही हंसता रहा है।। रूखा बदन सूखा भजन वो किस्मत का मारा हर पल अपनी ज़िंदगी को कोसता जा रहा है।। ईमान चीज़ क्या है,पढ़ा सबने किताबो में मौका मिलते ही इसां इसे बेचता जा रहा है।। सुकूँ घर का अपने अब उसने सब बेच दिया बेटी का पिता,उसके सपनो को सज़ा रहा है।। भूख़ा था ऐसे भूख़ा ही रहा वो छोटा बच्चा ख़ामोशियों का रुतबा बढ़ता ही जा रहा है।। सारी परेशानियों को सीने से लगा के बैठी है वो माँ है जिसको तू वर्द्धाश्रम ले जा रहा है।। वो तक़दीर वो तदबीर,है कोई नई तस्वीर वो अपनी किस्मत संवारने को ख़ुदा बुला रहा है।। वो सितारा बना चमक रहा,दूर आसमाँ में यूं तेरा मुझसे ऐसे हमेशा आकिब'वास्ता रहा है।।