बुलंद करके अपनी आवाज,कि आज जनता देती हैं
कि चोर,मक्कार हो जाओ सावधान जनता आती हैं
आज जनता के हौंसलों की सड़कों पर तू धार देख
सब-कुछ बदल रहा है अब अपना नजरिया उतार फेक
तू ने दमन किया हैं,
तो आज देख हम और बढ़ गए,
पहले से जनता में आ गया है कितना निखार देख
जुलुस नाटक सब जगह रख ले अपनी आज बात तू
जनता को सब पता हैं, पहचानती हैं तेरी नब्ज खूब
उठो क्रांति की कलम उठाकर,आज प्रजातंत्र की लिखो कहानी
जनता प्रजातन्त्र की रानी,राजा कुंवर भरेंगे अब पानी
बड़े बड़े तानाशाह को जनता ने पल पल याद दिला दी नानी
थोड़ा तनिक बड़े हो जाए भ्रस्टाचार को सब मिल कर मिटाये
हो गयी हैं जनता कितनी अब होशियार देख
अगर करे कोई अपनी मनमानी देती हैं गद्दी से उतार फेक
बुलंद करके अपनी आवाज,कि आज जनता देती हैं
कि चोर,मक्कार हो जाओ सावधान जनता आती हैं
किसान व्यापारी शिक्षक छात्र कितने हैं परेशान देख
कि जनता आती हैं, अपनी पुरानी राजनीती को उतार फेक
नही चलेगी अब धर्म जातिवाद की राजनीति देख
करना हो विकास गर तो ये अपना चश्मा उतार फेक
गाय दलित इस सबमे कितना उलझा कर सबको रख दिया
वादा था विकास का उसको क्यू ताक पर रख दिया
ये जनता नही इतनी भोली भाली देख
देता जो इसको धोखा है तो ये देती हैं गद्दी से उतार फेक
सच बोलना मना है गाँधी के अब देश में,
फिर भी करे अब हिमाक़त ये ख़ाकसार देख ।
आकिब'तू भी है लोकतंत्र में ये तेरी किस्मत है
वरना सच बोलने पर कहते अब देशद्रोही देख।।
-आकिब जावेद