इक  नज़र  उनसे मिलाई जाये अब  वफ़ा  उनसे निभाई जाये

कान  वो  बंद  किये बैठा है उसको  हर  बात  सुनाई जाये

दरमियाँ जो है मुहोब्बत के फिर ऐसी   दीवार   गिराई   जाये

गैर  से  आँख  मिलाते  वो  है अब  नज़र  अपनी  झुकाई जाये

याद  उनको  नही  है  हम शायद यादो  में  याद  डुबाई जाये

आते हो सपनो में ही तुम अक़्सर ख़ाब  की   ताबीर  बताई  जाये

है बिछड़ने कि ये साज़िश आकिब' कोई तोहमत   लगाई   जाये