किताब हूँ मैं
पढ़ो ध्यान से सब
मुझको खूब।
मन का साथी
विचारों में सौंदर्य
जीवन जियो
न हूँ संकीर्ण
मन लगाओ खूब
ज्ञान बटोरो।
बंदिशें तोड़ो
बनो तुम इन्सान
रोशन नाम ।
एकाकीपन
होती मुझसे दूर
मैं मुस्काता हूँ।
जानता सब
ज्ञान का घड़ा लिए
मैं सिखाता हूँ।
किताब हूँ मैं
"आकिब"सीखो अब
भर लो रंग।।
जीवन में तू
नित नए नए यूँ
ज्ञान के संग।।