
दिल से बात निकलेगी तो बहुत दूर तलक जायेगी
कैसे न अब हम फिर उस बात को यंहा पर इज़हार करे
एक बात कहनी है दिल की अपने
कैसे न अब हम तुमसे बयान करे
हो गर मजबूत कोमल दिल तुम्हारा
कैसे न अब हम अपने दिल का दर्द बयां करे
इस जमाने में नही हैं,अपना साया भी अपना
कैसे अब हम इस जमाने का विश्वास करे
दगा देना हो गयी हैं,लोगो की फितरत
कैसे अब खुद को तुमपर कुर्बान करे
जाति धर्म पर बाट दिया,लोगो से लोगोे को अब
कैसे अब हम लोगो को
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