है अँधेरा जिंदगी में हर तरफ,हर छड़ हर घड़ी
जिंदगी में अब एक नया उजाला होना चाहिए
है तमाशा जिंदगी में हर लम्हा हर वक्त हर समय
अब तो हमारी भी तकदीर बदलनी चाहिए
टकराता हैं मौजू दिल की वादियों से हर लम्हा,हर वक्त
दिल की गहराइयों को अब कोई समझने वाला चाहिए
देखा है अक्सर तंगदस्त फटे हाल लोगो की जिंदगी
अब जिंदगी में भी उनके इक उजाला होना चाहिए
नही मांगते अक्सर किसी से कुछ भी होते है जो खुद्दार
लोगो को देखकर जिंदगी उनकी अब समझना चाहिए
पैसा रुपया नही सब कुछ जो भी हैं इस जिंदगी में
थोड़ा सा दिल के कोने में ,
दया का एक उजाला होना चाहिए
घर के किसी कोने में रोती रहती हैं एक बूढी माँ
तुम्हारे दिल में माँ के लिए प्यार का एक उजाला चाहिए
मिलते रहते हो तुम अक्सर अल्हड़ अपनी मस्ती में
लोगो से मिलने का तुम्हे एक सलीका होना चाहिए
आकिब'बेजा नही किसी से मिलने की फरियाद करना
खुदा करे अब जिंदगी में तुम्हारे भी एक उजाला होना चाहिए।।
-आकिब जावेद