इस सृष्टि में अब यह अक्सर देखा जाता हैं लोगो ने अक्सर सूंदर मन,सूंदर काया ही देखा है दुनिया के रंगमेले में हमने अब यह देखा है लोगो के जज्बातो को हमने मरते देखा है इस दुनिया में भूखे लोग फिरते रहते है गली गली जज्बातो की उनकी बोली लगती हैं अब हर गली कोई प्यार में पागल मजनू सा फिरते रहता गली गली जज्बातो के उनकी नही रहती है अब कदर किसी गली समाज में लोगो के दिलो में नही है अब कोई जज्बात अपने घर के ही बुजुर्गों के सपनों को मारते रहते हर घड़ी दुनिया की इस भीड़ में कुछ अब खो सा गया हैं जज्बात लोगो के दिलो में अब सो सा गया हैं सियासत दाँ के सीने में अब नही कोई नरमी हैं नेताओ के सीने से अब जज्बात अब मर सा गया हैं कंही बुड्ढे कंही किसान कही लड़कियां पिटती हैं सिसायत के गलियारों में जज्बातो की बोली लगती हैं हैं हवाओ का रूख किधर अब मेरे देश का लोगो के जज्बात भी अब मुह देखकर फिरते है कंही जात के नाम पर कभी धर्म के नाम पर अक्सर लोगो के जज्बातो को कुचला जाता हैं लोगो के जज्बातो से खेलते मिलता जिसको मौक़ा हैं अक्सर इन मौको में लोगो के जज्बातो को मरते देखा हैं आकिब'अपने जज्बातो पर काबू रखना अक्सर जज्बातो की अब यंहा बोली लगती हैं।। -आकिब जावेद