वो मासूमो से खेलने वाला बचता जाएगा इन खेलों में आम इंसा ही पिसता जाएगा।। दर्द से चीख रही वो मासूम बच्चियां दरिंदगी को कब तलक मिटाया जाएगा।। आसिफा हो या की अब यहाँ निर्भया लक्ष्मी देवियो को क्या ऐसे कुचला जाएगा।। कुंठित सोच के है लोग सब यहाँ समाज से बुराइयों को कब हटाया जाएगा। धर्म जाती में सब अपने है यहाँ उलझे हुए तेरे साथ जब ऐसा होगा तो सहमा जाएगा। खिलौनो से खेलने की उम्र में अब उनसे वहशियत करने से सपना टूटता जाएगा।। परायी नारी के दामन को छूने की चाहत। कुंठितो की मानसिकता को मिटाया जाएगा हर लम्हा किसी न किसी को घूरती निगाहे बच्चो को नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाएगा।। आज वो है कल वहाँ तुम होंगे अगला निशाना तुम्हे बनाया जाएगा।। बेकसूरों को सजा मिलती है यहाँ दोषियों को निर्दोष समझा जाएगा।।